
mera naam meri pehchan hai. sayad isleye mere mata pita ne mera naam pya se rani raka par unhone ek naya naam karan kar diya sunita singh. naam to mila par pehchan nahi. isleye padna suru ki. padai katam hoe ke bad phir dil mey aaya kyo na job kar liya jaye to wo bhi icici may job karte waqt phir man mey aaya ki kyo na koi course kar liya jaye. to m.j.m.c maei admission lekar padai suru ho gai.aur uske turant aachi kismat hai meri sayad apni pehchan banane ke kagar pe hu yani nokari.
Tuesday, September 7, 2010
दुर
फिर भी आश रहती है
वो है यहीं आस पास मेरे
पर खुदा को यह रास न आया
मेरा खुशियां
मेरी हंसी
पता नहीं उसे क्यों न रास आया
वो अब इस जहां में नहीं
वो आश
वो उम्मीदें
चला गया उसके साथ
सब कहते है खुदा बुरा नहीं करता
जो उसने किया वो क्या है
दिल अब नहीं मानता खुदा भी कोई है
ये तो एक अल्फाज है
जिसे हमने एक नाम दे दिया
इसके अलावा वो कुछ भी नहीं
पत्थर की मुरत भी रो पड़ती है
किसी को तड़पता देख
किसी के प्यार में किसी को मरता देख
पर यह खुबी इस खुदा में नहीं..............
Sunday, May 9, 2010
जहा मै मै न रह पाऊ
मत बांधो मुझे ऐसे रिश्ते मे
जिसे मे चाहकर भी निभा न पाऊ
शारीर का आत्मा से एक रिश्ता है
दोनों एक दुसरे से जुदा
तो कुछ भी नहीं है
विवश न करो मुझे
एक ऐसी जिंदगी जीने के लिये
जहा मे सब कुछ पाकर भी है
सब कुछ खो दु
मत टुकड़े करो मेरे
जहा मै न तुम्हारी ही रह सकू
न बन सकू किसी और की
जी करता है तोड़ दू उस वचन को
जिसने मुझे बांध रखा है
जिस वचन को दे कर
तुम मुक्त हो
हर एक बंधन से
मुक्त हो तुम ,
जज्बातों के उठने वाले उस भवर से
मुक्त हो तुम
हर उस रिश्ते से जिसे तुम निभाना नहीं चाहते
मुक्त हो तुम
मुझे अपनी मजबूरियों के हवाले कर
मुक्त हो तुम
मुझे वचनों के बंधन में बांध कर
मुझे दो नाव में सवार कर
तुम खुश हो अपने जीवन में
मुझ से मेरे जिंदगी छीन कर
Tuesday, April 13, 2010
Wednesday, March 24, 2010
Monday, March 22, 2010
Monday, March 15, 2010
आज भी मेरे आखों मे
वो दिन ठहरे हुए से है
जब मुझे छोड़ कर तुम
यु हँस रहे थे
अकेले तन्हाई के हवाले कर
मेरी खुशिया अपने साथ ले कर
मुझे छोड़ चले गए थे
उस दिन मेरे आखों मे
मैंने दर्द छुपा कर तुमसे
एक और विदाई मागी थी
अकेले तनहा रोने का नाता जोड़
तुझसे दूर रहने की विदाई मागी थि
वो जिस दिन जाना था तुम्हे
तब कोशिश की थी कई बार
न गिरे आखों से आसू
उस मे भी आसफल हो
कर कूद को कोष रही थि
मुस्कुरा रहे थे तुम सब के साथ
देख कर मुझे अनदेखा कर रहे थे
और मेरी आखे दिल मे छुपी
दर्द बयां कर रही थी
एक पल लगा मुझे तुम्हारी नजरे दुंद रही हो मुझे
फिर मुस्कुराई थी खुद के पागलपन पे
तुम्हे युही कितने देर तक dek रह जाना
और उन पालो मे कूद के आसू को रोक पाना
मुस्किल था बहुत मेरे लिये
वो जुदाई का पल मेरे लिये देख पाना सम्बह्वा न था
मे वह से कुछ दूर बठी
तुझे विदा कर रही थि
वो पल रुक सा गया था मेरे लिये
हर कोई तुझे विदा कर रहा था
मेरे लिये वो पल बहुत कठिन था
दिल करता था तुझे एक बार फिर देख लू
फिर तुझ से मुलाकात हो या न हो
पर कदम न आगे बढ़ रहे थे नपीछे
तुम चले गए मे देखती रह गई तुम्हे
फिर एक झूटी आस लगाये बैठइ हु
आओगे फिर एक बार इस इंतजार मई